
जिशान अहमद | मैनाटाड़
मैनाटाड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रैबीज की सुई पिछले आठ दिनों से उपलब्ध नहीं है, जिससे इलाज के लिए आने वाले मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रतिदिन अस्पताल में 10 से 15 लोगों को रैबीज की सुई दी जाती है, लेकिन दवा खत्म होने के बाद मरीजों को निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा है। मंगलवार को सुई लेने पहुंचे मैनाटाड़ थाना क्षेत्र के पिपरा संतपुर निवासी 80 वर्षीय मोती दास को बिना इलाज के ही लौटना पड़ा। बुजुर्ग मोती दास ने बताया कि जानवर के काटने के बाद समय पर सुई लगना बेहद जरूरी होता है, लेकिन अस्पताल में दवा नहीं होने से उनकी चिंता और डर दोनों बढ़ गए हैं। अस्पताल सूत्रों के अनुसार 2 फरवरी को प्रखंड क्षेत्र के अलग-अलग गांवों से आए 72 लोगों को एक ही दिन में रैबीज की सुई दी गई थी। इसके बाद 3 फरवरी को स्टॉक पूरी तरह समाप्त हो गया। तब से अब तक नए स्टॉक की आपूर्ति नहीं हो सकी है।रैबीज जैसी जानलेवा बीमारी में समय पर टीकाकरण बेहद आवश्यक होता है। ऐसे में दवा की कमी ने मरीजों और उनके परिजनों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोग सीमित संसाधनों के कारण निजी अस्पतालों में इलाज कराने में असमर्थ हैं।स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से अविलंब रैबीज की सुई उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द व्यवस्था नहीं की गई तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। अस्पताल में दवा के अभाव ने स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए है। इधर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ विजय कुमार चौधरी ने बताया कि रैबीज की सुई एक से दो दिनों के अंदर आ जाएगी, ताकि मरिजों को किसी तरह की परेशानी नही हो।





