
जिशान अहमद | बेतिया
पश्चिमी चंपारण जिले के पुरुषोत्तमपुर थाना क्षेत्र के तिलंगही बहुअरवा गांव में एक नवविवाहिता की संदिग्ध परिस्थिति में हुई मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। मृतका की पहचान तिलंगही बहुअरवा गांव निवासी अरविंद साह की पत्नी आरती देवी (22 वर्ष) के रूप में हुई है। मायके वालों ने दहेज के लिए हत्या करने का गंभीर आरोप लगाया है। घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है, जबकि मृतका के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।बताया जाता है कि आरती देवी की शादी वर्ष 2023 के फरवरी माह में नेपाल के परसा जिला अंतर्गत मुरली गांव निवासी नागेंद्र साह ने हिंदू रीति-रिवाज के साथ बड़े अरमानों से की थी। पिता के अनुसार शादी में करीब आठ लाख रुपये खर्च किए गए थे। कुछ महीनों तक बेटी का दांपत्य जीवन ठीक-ठाक चला, लेकिन बाद में ससुराल पक्ष के लोग पांच लाख रुपये अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर आरती को प्रताड़ित करने लगे।
मृतका के पिता नागेंद्र साह ने प्राथमिकी में आरोप लगाया है कि उनकी बेटी को लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। उन्होंने कहा कि “बेटी कई बार फोन कर अपनी पीड़ा बताती थी, लेकिन समाज और रिश्ते बचाने की खातिर हम उसे समझाकर शांत कर देते थे। हमें क्या पता था कि दहेज लोभियों के हाथों हमारी बेटी की जिंदगी ही छिन जाएगी।” घटना गुरुवार रात की बताई जा रही है। देर रात सूचना मिली कि आरती की मौत हो गई है। सूचना मिलते ही मायके वाले तिलंगही बहुअरवा पहुंचे, जहां घर के अंदर आरती का शव पड़ा मिला। बेटी का शव देखते ही मां-बाप दहाड़ मारकर रो पड़े। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।पुरुषोत्तमपुर थानाध्यक्ष सुधा कुमारी ने बताया कि मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए मृतका के पति अरविंद साह और सास बबुनी देवी को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं शुक्रवार सुबह एफएसएल टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर जांच की।मृतका के पिता के आवेदन पर पति अरविंद साह, सास बबुनी देवी, ससुर भूषण साह, शोभा कुमारी, रिंकी देवी, पिंकी देवी और बिट्टू साह के विरुद्ध दहेज हत्या सहित अन्य सुसंगत बीएनएस धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस के अनुसार अन्य आरोपी घर छोड़कर फरार हैं और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। आरती की मौत ने एक बार फिर दहेज प्रथा की भयावह सच्चाई को सामने ला दिया है। जिस घर में शादी के बाद खुशियों की किलकारियां गूंजनी चाहिए थीं, वहां आज मातम पसरा है। मां की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे, तो पिता बार-बार यही कहकर बिलख पड़ते हैं , हम अपनी बेटी को विदा किए थे, उसकी अर्थी देखने के लिए नही।





