
यस बिहार | मैनाटाड़
मानपुर थाना क्षेत्र के बिरंची तीन गांव से सटे मक्के के खेत में बाघिन के पदचिन्ह देखे जाने से लोगों में दहशत का माहौल है। ग्रामीण शिबू कुंडू, दिनेश मजूमदार, संजय केसरी, दीपाकर केसरी, लखीकांत मलिक, नीताई मलिक, वासुदेव सरकार, मनोज बर्मन आदि ने बताया कि संजय केसरी के घर के बगल स्थित दिनेश मजूमदार के मक्के के खेत में मंगलवार की शाम बाघ जैसे जानवर के पदचिन्ह देखकर सभी दंग रह गए।
ग्रामीणों ने बताया कि पदचिन्हों से पूरी संभावना जताई जा रही है कि जंगल से भटका बाघ रिहायशी क्षेत्र के सरेह में आ गया है। बाघ के भय से लोग खेतों की ओर जाना छोड़ चुके हैं। खेतों में लगी गेहूं, मक्का और सब्जी की फसल की सिंचाई प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि बाघ के डर से वे जंगली जानवरों, जैसे नीलगाय और हिरण से भी अपनी फसल की रक्षा नहीं कर पा रहे हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वन विभाग को सूचना देने पर कर्मी जांच कर लौट जाते हैं, लेकिन कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की जाती। उन्होंने मांग की है कि मक्के की फसल में पटवन की आवश्यकता को देखते हुए वन विभाग के कर्मी मौके पर मौजूद रहें, ताकि वे बिना भय के खेतों में जा सकें। पानी के अभाव में मक्के की फसल खराब होने की आशंका है। मानपुर वन क्षेत्र के इधर रेंजर हिमांशु कुमार ने बताया कि पदचिन्हों की जांच की गई है और यह स्पष्ट हुआ है कि वे बाघिन के हैं। उन्होंने कहा कि जानवरों की गंध पाकर बाघ जंगल के समीपवर्ती इलाकों में निकल आते हैं।फिलहाल बाघिन पुनः जंगल की ओर लौट गई है। वन कर्मी लगातार गश्त कर रहे हैं और लोगों को जागरूक किया जा रहा है कि वे खेतों में अकेले न जाएं। उल्लेखनीय है कि गत 28 जनवरी को मानपुर थाना क्षेत्र के पुरैनिया गांव के पश्चिम दोरहम नदी के तट पर एक बाघ का शव मिला था, जिसकी मौत करंट लगने से हुई थी। इसी घटना को लेकर बिरंची तीन गांव के लोग और अधिक सहमे हुए हैं, क्योंकि पुरैनिया गांव की दूरी यहां से लगभग डेढ़ किलोमीटर है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे स्पष्ट है कि मानपुर वन क्षेत्र के रिहायशी इलाकों में बाघ का मूवमेंट बना हुआ है।

