
यस बिहार | गौनाहा
गौनाहा प्रखण्ड अंतगर्त भारत–नेपाल सीमा पर स्थित भिखनाठोरी गांव में जिला कार्यपालक अभियंता देवबंस कुमार ने पहुंचकर विभिन्न विकास कार्यों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने सड़क निर्माण, पुल-पुलिया, पेयजल आपूर्ति, स्कूल भवन तथा बांध की स्थिति की जानकारी ली। निरीक्षण के क्रम में अभियंता ने ग्रामीणों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और कहा कि पूरी रिपोर्ट जिला पदाधिकारी को सौंपी जाएगी। स्थानीय लोगों ने सड़क मरम्मत, जल निकासी और बिजली आपूर्ति से जुड़ी दिक्कतों को प्रमुखता से उठाया। इस पर उन्होंने आश्वासन दिया कि प्राथमिकता के आधार पर समस्याओं का समाधान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती गांवों का समुचित विकास सरकार की प्राथमिकता है और आधारभूत संरचना मजबूत होने से व्यापार, आवागमन तथा सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। इसी बीच भिखनाठोरी गांव के 86 लोगों को गौनाहा अंचल प्रशासन की ओर से गांव खाली करने का नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन का कहना है कि संबंधित परिवार वन विभाग की जमीन पर अवैध रूप से बसे हुए हैं। जारी नोटिस में सभी 86 परिवारों को 24 फरवरी तक भूमि खाली करने का निर्देश दिया गया है।अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई सरकारी अभिलेखों और भूमि सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि जिस जमीन पर लोग निवास कर रहे हैं, वह संरक्षित वन क्षेत्र के अंतर्गत आती है, इसलिए वहां किसी प्रकार का निजी कब्जा वैध नहीं माना जाएगा। नोटिस मिलने के बाद प्रभावित परिवारों में चिंता का माहौल है। ग्रामीण मुखिया रामबिहारी महतो, पूर्व मुखिया दयानंद सहनी, मोती पासवान, ग्राम वनाधिकार अध्यक्ष पूना सिंह एवं दिनानाथ साह ने बताया कि वे कई वर्षों से यहां रह रहे हैं और उनके पास रहने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। उनका कहना है कि रेलवे और वन विभाग की ओर से समय-समय पर नोटिस चस्पाया जाता रहा है, जिससे ग्रामीणों में असमंजस की स्थिति बनी रहती है।ग्रामीणों ने प्रशासन से पुनर्विचार करते हुए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि सीमावर्ती क्षेत्र के परिवारों को बेघर होने की स्थिति का सामना न करना पड़े।





