
यस बिहार | पटना
बिहार विधानसभा में एआईएमआईएम के विधायक अख्तरुल ईमान ने भाजपा सरकार की नीतियों पर जोरदार हमला बोला। खुले में मांस और मछली बेचने पर रोक तथा लाइसेंस अनिवार्य करने के फैसले को लेकर उन्होंने सरकार पर गरीबों के शोषण का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस तरह के फैसलों से छोटे स्तर पर जीवनयापन करने वाले लोगों की रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ेगा। अख्तरुल ईमान ने उदाहरण देते हुए कहा कि गांवों में मल्लाह समुदाय के लोग नदी-तालाब से मछली पकड़कर दो-चार किलो बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। ऐसे लोगों के लिए लाइसेंस लेना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने सरकार से मांग की कि छोटे और गरीब विक्रेताओं को लाइसेंस की बाध्यता से मुक्त किया जाए, ताकि उनकी आजीविका सुरक्षित रह सके। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में लगभग 80 प्रतिशत लोग मांस और मछली का सेवन करते हैं, ऐसे में यह फैसला व्यापक जनसंख्या को प्रभावित करेगा। सरकार की आर्थिक स्थिति पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि राज्य का खजाना खाली हो चुका है और राजस्व बढ़ाने के लिए हर क्षेत्र में टैक्स और चालान के माध्यम से आम लोगों पर बोझ डाला जा रहा है। बिजली बिल में बढ़ोतरी और छोटे कारोबारियों पर कार्रवाई को उन्होंने गरीबों के खिलाफ अन्याय बताया। उनका आरोप था कि सरकार गांव-गांव में छोटे दुकानदारों और विक्रेताओं को परेशान कर रही है। राज्यसभा चुनाव को लेकर भी उन्होंने अपनी पार्टी की स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उन्होंने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से आग्रह किया है कि इस बार उनकी पार्टी को राज्यसभा में प्रतिनिधित्व का अवसर दिया जाए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में सहयोग को लेकर उनकी पार्टी सकारात्मक रुख रखेगी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बिहार दौरे पर प्रतिक्रिया देते हुए अख्तरुल ईमान ने कहा कि सीमांचल क्षेत्र में हिंदू-मुस्लिम एकता कायम है और चुनावी राजनीति के लिए अनावश्यक मुद्दे बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सीमांचल और सीमावर्ती इलाकों में बेरोजगारी और पलायन गंभीर समस्या है, लेकिन सरकार का ध्यान इन मूल मुद्दों पर नहीं है। अख्तरुल ईमान ने यह भी संकेत दिया कि उनकी पार्टी आने वाले समय में अपनी रणनीति के अनुसार निर्णय लेगी और फिलहाल सभी पहलुओं पर विचार किया जा रहा है।





