
यस बिहार | मोतिहारी
मोतिहारी ज़िले के बड़ा बरियारपुर स्थित मदरसा ख़ैरुल उलूम में हर साल की तरह इस साल भी एक अज़ीम, रूहानी और इल्मी दस्तारबंदी जलसे का आयोजन बड़े ही एहतेराम और अकीदत के साथ किया गया। इस मुबारक मौके पर मदरसे से क़ुरआन मजीद हिफ़्ज़ मुकम्मल करने वाले 26 हुफ़्फ़ाज़े किराम की दस्तारबंदी कर उन्हें समाज और दीन की खिदमत के लिए तैयार होने की दुआओं के साथ सम्मानित किया गया। इस पाक जलसे की तालमी सरपरस्ती मुफ़्ती जुनैद आलम साहब क़ासमी ने की, जबकि कार्यक्रम की निज़ामत मदरसे के नाज़िम मौलाना जमालुद्दीन साहब ने अति सुचारू ढंग से निभाई। जलसे की शुरुआत तिलावते कलामे पाक से हुई, जिससे पूरा माहौल रूहानियत और नूर से भर गया। मुफ़्ती ज़फ़रुल्लाह साहब क़ासमी, मौलाना अमीनुल्लाह क़ासमी, क़ारी इमरान साहब, क़ारी नज़्मुज़ जमा साहब, मुफ़्ती सनाउल हुदा साहब नायब नाज़िम, इमारते सरैया सहित कई मुअज्ज़िज़ उलेमा-ए-किराम और इलाके के दीनदार लोग मौजूद रहे। उलेमा-ए-किराम ने अपने असरदार ख़िताब में कहा कि हिफ़्ज़-ए-क़ुरआन एक अज़ीम नेअमत और बड़ी ज़िम्मेदारी है। हाफ़िज़-ए-क़ुरआन न सिर्फ़ अपने परिवार बल्कि पूरे समाज के लिए रहमत का ज़रिया होता है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में मदरसे दीन, अख़लाक़ और सही तालीम की हिफ़ाज़त का सबसे मज़बूत क़िला हैं।जलसे के दौरान सभी 26 हुफ़्फ़ाज़े किराम को दस्तार पहनाई गई, साथ ही उन्हें इनामात और हौसला-अफ़ज़ाई से नवाज़ा गया। बच्चों की कामयाबी पर अभिभावकों के चेहरों पर खुशी साफ़ झलक रही थी। बड़ी संख्या में मौजूद लोगों ने मदरसा इंतज़ामिया की इस ख़िदमत की सराहना की।कार्यक्रम के अंत में मुल्क, सूबे, इलाक़े और पूरी उम्मत-ए-मुस्लिमा की सलामती, तरक़्क़ी और अमन-चैन के लिए ख़ुसूसी दुआ की गई। जलसे के शांतिपूर्ण और कामयाब आयोजन पर मदरसे की तालीमी और तंजीमी मेहनत की हर तरफ़ तारीफ़ की गई।





