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Bihar news : ओमान की खाड़ी में हमले में बेतिया के कैप्टन आशीष कुमार की मौत, पांच साल का बेटा अब भी कर रहा पिता का इंतजार

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यस बिहार | बेतिया

Bettiah news : ओमान की खाड़ी से आई एक दर्दनाक खबर ने पूरे बेतिया को शोक में डुबो दिया है। मर्चेंट नेवी में बतौर कप्तान तैनात बेतिया के रहने वाले कैप्टन आशीष कुमार की तेल टैंकर पर हुए हमले में मौत हो गई। ओमान की खाड़ी से आई एक दर्दनाक खबर ने पूरे बेतिया को शोक में डुबो दिया है। मर्चेंट नेवी में बतौर कप्तान तैनात बेतिया के रहने वाले कैप्टन आशीष कुमार की तेल टैंकर पर हुए हमले में मौत हो गई। इस खबर के बाद उनके घर में मातम छा गया है और पूरे शहर में शोक की लहर फैल गई है। जानकारी के अनुसार ओमान की खाड़ी में जिस तेल टैंकर पर हमला हुआ, उसी जहाज के इंजन कक्ष में कैप्टन आशीष कुमार मौजूद थे। हमले के बाद जहाज में भीषण आग लग गई और वह आग की लपटों में घिर गए। गंभीर रूप से झुलसने के कारण उनकी मौत हो गई। परिवार पिछले तीन दिनों से उन्हें लापता मानकर किसी चमत्कार की उम्मीद लगाए बैठा था। लेकिन देर रात ई-मेल के जरिए जब यह खबर मिली कि आशीष अब इस दुनिया में नहीं रहे, तो पूरा परिवार टूट गया। घर में चीख-पुकार और मातम का माहौल है। परिजनों ने बताया कि कल तक उन्हें उम्मीद थी कि आशीष किसी तरह सुरक्षित लौट आएंगे, लेकिन मौत की खबर ने सारी उम्मीदें खत्म कर दीं। परिवार अब सरकार से गुहार लगा रहा है कि ओमान में जरूरी प्रक्रियाएं जल्द पूरी कर आशीष के पार्थिव शरीर को भारत लाया जाए, ताकि अंतिम विदाई दी जा सके। मृतक के भाई आकाश ने बताया कि 20 जनवरी 2026 को आशीष ने मर्चेंट नेवी जॉइन की थी और उनकी पहली पोस्टिंग दुबई में हुई थी। इसके बाद 22 फरवरी को उन्होंने ओमान जाने वाले “स्काई-लाइट” ऑयल टैंकर पर ज्वाइन किया था, जिसका IMO नंबर 9330020 था। इसी जहाज पर वह बतौर कप्तान तैनात थे और इसी टैंकर पर मिसाइल से हमला हुआ। परिवार ने बेतिया के सांसद डॉ. संजय जायसवाल का भी आभार जताया है। परिजनों का कहना है कि उनकी लगातार कोशिशों और ओमान में संपर्क के कारण ही आशीष के बारे में सही जानकारी मिल सकी। आशीष कुमार तीन भाइयों में सबसे बड़े थे। उनके पिता अशोक कुमार पेशे से वकील हैं और मां सुनीता देवी गृहिणी हैं। पत्नी अंशु कुमारी का रो-रोकर बुरा हाल है। सबसे मार्मिक दृश्य उनके घर का है, जहां उनका पांच साल का बेटा दक्ष अब भी अपने पिता के लौटने का इंतजार कर रहा है। उसे शायद अभी भी यह नहीं पता कि जिसके इंतजार में वह दरवाजे की ओर देखता है, वह पिता अब कभी वापस नहीं आएंगे। इस दर्दनाक घटना ने न केवल एक परिवार को तोड़ दिया है, बल्कि पूरे बेतिया को गहरे शोक में डुबो दिया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जल्द से जल्द कैप्टन आशीष कुमार का पार्थिव शरीर भारत लाया जाए, ताकि उन्हें अंतिम विदाई दी जा सके।

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