Bihar news : बिहार विधानसभा में गूंजा जीएमसीएच बेतिया की बदहाली का मुद्दा, डॉक्टरों पर मारपीट के आरोपों से स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

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यस बिहार | बेतिया 


सार – बिहार विधानसभा के सदन में आज पश्चिम चंपारण जिला मुख्यालय स्थित राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल, बेतिया की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर चनपटिया विधायक अभिषेक रंजन ने गंभीर चिंता व्यक्त की ।

बिहार विधानसभा के सदन में आज पश्चिम चंपारण जिला मुख्यालय स्थित राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल, बेतिया की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर चनपटिया विधायक अभिषेक रंजन ने गंभीर चिंता व्यक्त की । सदन के माध्यम से सरकार का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया कि जीएमसीएच बेतिया केवल पश्चिम चंपारण ही नहीं, बल्कि पूर्वी चंपारण, गोपालगंज और पड़ोसी देश नेपाल से आने वाले हजारों मरीजों के लिए जीवनरेखा के समान है। इसके बावजूद यहां मरीजों को न तो सुरक्षित माहौल मिल पा रहा है और न ही सम्मानजनक इलाज। विधानसभा में यह मुद्दा उन्होंने प्रमुखता से उठाया कि जीएमसीएच अस्पताल में जूनियर एवं इंटर्न डॉक्टरों द्वारा मरीजों और उनके परिजनों के साथ मारपीट की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। बीते महज तीन महीनों के भीतर इस तरह की कम से कम पांच घटनाएं हो चुकी हैं, जिसने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल की दो घटनाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं, जिनमें मरीजों और उनके परिजनों के साथ बदसलूकी और हिंसा साफ देखी जा सकती है। सदन को यह भी बताया गया कि एक मामले में नगर थाना कांड संख्या 46/26 दर्ज होने के बावजूद अब तक किसी भी दोषी डॉक्टर के विरुद्ध ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। इससे न सिर्फ पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पा रहा, बल्कि अस्पताल प्रशासन और जिला प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवालिया निशान लग रहे हैं। विधानसभा में यह भी उल्लेख किया गया कि जब से जीएमसीएच बेतिया की अधीक्षक के रूप में डॉ. सुधा भारती की पदस्थापना हुई है, तब से अस्पताल से जुड़ी अव्यवस्थाओं, विवादों और मारपीट की घटनाओं की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। इलाज के लिए आने वाले मरीज खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, वहीं उनके परिजन भय और असहायता के माहौल में जी रहे हैं। आगे उन्होंने कहा की हैरानी की बात यह भी सामने है कि माननीय स्वास्थ्य मंत्री स्वयं पश्चिम चंपारण जिले के प्रभारी मंत्री हैं, इसके बावजूद इतने बड़े और संवेदनशील अस्पताल की स्थिति में अब तक कोई ठोस और प्रभावी सुधार देखने को नहीं मिला है। यह स्थिति आम जनता के स्वास्थ्य और भरोसे दोनों के साथ खिलवाड़ मानी जा रही है।सदन में स्पष्ट और दो टूक मांग की गई कि मरीजों और उनके परिजनों के साथ मारपीट करने वाले दोषी डॉक्टरों के विरुद्ध अविलंब कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही जीएमसीएच बेतिया की संपूर्ण स्वास्थ्य व्यवस्था की उच्चस्तरीय जांच कराकर आवश्यक सुधार जल्द से जल्द सुनिश्चित किया जाए, ताकि आम जनता को सुरक्षित, संवेदनशील और सम्मानजनक चिकित्सा सुविधा मिल सके। विधानसभा में उठी यह आवाज न सिर्फ एक अस्पताल की बदहाली की कहानी कहती है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करती है कि क्या सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में आम मरीज की जान और सम्मान वास्तव में सुरक्षित है?

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