ऐतिहासिक धरोहर की देखरेख भगवान भरोसे, अकेला सफाईकर्मी संभाल रहा जिम्मेदारी

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अजमेर आलम | गौनाहा, बेतिया

गौनाहा प्रखंड अंतर्गत स्थित विश्व प्रसिद्ध रमपुरवा अशोक स्तंभ एक बार फिर अव्यवस्था और लापरवाही को लेकर चर्चा में है। भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा यहां संरक्षण सहायक के पद पर तैनात कर्मी पप्पू कुमार यादव पर गंभीर आरोप लग रहे हैं कि वे नियमित रूप से ड्यूटी पर नहीं आते और साल में महज एक–दो बार ही अशोक स्तंभ परिसर में दिखाई देते हैं। इसे लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, रमपुरवा अशोक स्तंभ परिसर में तैनात सफाईकर्मी योगेंद्र मांझी ही एकमात्र ऐसे कर्मचारी हैं, जो नियमित रूप से उपस्थित रहकर सफाई एवं देखरेख का कार्य करते हैं। उनके अलावा कोई अन्य संबंधित कर्मी प्रायः नजर नहीं आता। योगेंद्र मांझी ने बताया कि वे अकेले ही पूरे परिसर की सफाई करते हैं और वर्षों से यही स्थिति बनी हुई है। जानकारी के मुताबिक, संरक्षण सहायक पप्पू कुमार यादव लौरिया प्रखंड के मरियां गांव के निवासी हैं और उन्हें भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा इस ऐतिहासिक धरोहर की सुरक्षा एवं संरक्षण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि वे साल में एक या दो बार ही यहां आते हैं, कुछ देर रुकते हैं और फिर लौट जाते हैं। नियमित ड्यूटी निभाने का कोई प्रमाण दिखाई नहीं देता। इस मामले में जब पप्पू कुमार यादव का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो मोबाइल नंबर उपलब्ध न होने के कारण उनसे संपर्क नहीं हो सका। हालांकि, उनके पिता राजा राम यादव, जो लौरिया के नंदगढ़ क्षेत्र में कार्यरत बताए जा रहे हैं, ने सभी आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा, “मेरा बेटा भारतीय पुरातत्व विभाग के अंतर्गत संरक्षण सहायक के पद पर प्रतिनियुक्त है और वह प्रतिदिन रमपुरवा अशोक स्तंभ पर ड्यूटी करने जाता है। शाम को घर लौट आता है। उस पर लगाए जा रहे आरोप गलत हैं। वहीं, स्थानीय सूत्रों का दावा इससे बिल्कुल उलट है। उनका कहना है कि यदि पप्पू कुमार यादव नियमित रूप से ड्यूटी पर आते-जाते हैं, तो इसकी पुष्टि आसानी से की जा सकती है। सूत्रों के अनुसार नरकटियागंज से रमपुरवा गौनाहा मार्ग पर दर्जनों स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच या फिर मोबाइल लोकेशन डेटा के जरिए साफ हो जाएगा कि वे वास्तव में ड्यूटी करते हैं या नहीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सम्राट अशोक के काल की यह ऐतिहासिक धरोहर देश और दुनिया के लिए अमूल्य धरोहर है। ऐसे में जिम्मेदार पद पर तैनात कर्मी की अनुपस्थिति न सिर्फ विभागीय लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि धरोहर की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या भारतीय पुरातत्व विभाग या जिला प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करेगा? और क्या रमपुरवा अशोक स्तंभ जैसी ऐतिहासिक धरोहर को लापरवाही से बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे? स्थानीय लोग प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि इस मामले की जल्द जांच हो और सच्चाई सामने लाई जाए, ताकि देश की विरासत यूं ही उपेक्षा की शिकार न होती रहे।

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