
यस बिहार | नरकटियागंज
शिक्षा और तालीम केवल किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि यह इंसान की सोच, चरित्र और भविष्य को संवारने का सबसे मजबूत आधार है। इसके बिना न तो बेहतर जीवन की कल्पना की जा सकती है और न ही सशक्त समाज की। उक्त बातें पूर्वी चंपारण के दरियापुर स्थित मदरसा इस्लामिया के निदेशक मौलाना अब्दुल्ला कासमी ने नरकटियागंज के शिवगंज वार्ड संख्या 6 स्थित मदरसा तजवीदुल कुरआन एकेडमी में आयोजित भव्य दस्तारबंदी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि शिक्षा हर इंसान का मौलिक अधिकार है और यह हर बच्चे तक पहुंचनी चाहिए। मदरसा और स्कूलों में बच्चों के लिए बेहतर से बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिसका सकारात्मक असर बच्चों की तालीम और तरक्की में साफ दिखाई दे रहा है। मौलाना कासमी ने उन अभिभावकों से विशेष अपील की, जिनके बच्चे अभी भी तालीम से वंचित हैं, कि वे अपने बच्चों को विद्यालय या मदरसे से जोड़कर उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव रखें। कार्यक्रम की अध्यक्षता मदरसा के व्यवस्थापक कारी साहेब हुसैन ने की, जबकि संचालन ईदगाह मस्जिद के इमाम कारी अब्दुल्ला कासमी ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत मदरसा के बच्चों द्वारा पवित्र कुरआन की तिलावत से हुई, जिसने पूरे माहौल को रूहानी बना दिया। इस अवसर पर मदरसा के बच्चों ने नात, तिलावत और प्रभावशाली तकरीर पेश कर लोगों का दिल जीत लिया।

कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण उस वक्त आया, जब महज 13 वर्षीय रय्यान रहमान—हाफिज मोहम्मद फजल उर रहमान के पुत्र—की हिफ्ज़-ए-कुरआन की तकमील पर दस्तारबंदी की गई और उन्हें पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। यह पल न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि पूरे इलाके के लिए गर्व और प्रेरणा का क्षण बन गया।मौके पर मौलाना मसूद अहमद कासमी ने कहा कि शिक्षा वह रास्ता है, जो नफरत की दीवारों को गिराकर मोहब्बत, भाईचारे और इंसानियत का संदेश देती है। उन्होंने सभी समाज के लोगों से आपसी सौहार्द और भाईचारे के साथ रहने की अपील की, ताकि क्षेत्र, राज्य और देश तरक्की की राह पर आगे बढ़ सके। कार्यक्रम में हाफिज अखलाक अहमद, मोहम्मद मोहिउद्दीन, अल्ताफ हुसैन, वार्ड पार्षद मोहम्मद हसनैन, मनीर आलम, हाजी हाशिम अंसारी, हाजी मोहम्मद जान, अधिवक्ता मोहम्मद इरफान अली, राजू जेंटलमैन, इकबाल अहमद, नसीम आलम, फिरोज असलम, मोहम्मद फैसल अली सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग और अभिभावक मौजूद रहे। यह दस्तारबंदी कार्यक्रम न सिर्फ तालीम की अहमियत को दर्शाता है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि जब शिक्षा और संस्कार एक साथ चलते हैं, तभी एक बेहतर इंसान और मजबूत समाज का निर्माण होता है।





