Bihar news : जीएमसीएच बेतिया में इलाज नहीं, इंसाफ की गुहार, जूनियर डॉक्टरों की गुंडागर्दी, परिजनों को जूतों-लातों से पीटा

Posted by

जीएमसीएच बेतिया – फोटो : यस बिहार

बेतिया।

जिस अस्पताल को जीवन बचाने का आखिरी सहारा माना जाता है, वहीं अगर सवाल पूछने पर लात-घूंसे और जूते बरसने लगें, तो आम आदमी किस दरवाजे पर जाएगा? राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल जीएमसीएच बेतिया में एक बार फिर वही हुआ, जिसने इंसानियत और चिकित्सा व्यवस्था दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। इलाज के लिए अपनी मां को लेकर पहुंचे बेटे को डॉक्टर से सवाल पूछना इतना भारी पड़ गया कि दस से अधिक जूनियर डॉक्टरों और मेडिकल इंटर्न छात्रों ने मिलकर उसे सरेआम पीटा। लात, घूंसे और जूतों से हुई इस पिटाई का वीडियो अब सामने आ चुका है, जो अस्पताल के भीतर फैली अराजकता और भय का खौफनाक चेहरा दिखा रहा है।

मां की सांस छिनती देख उठा सवाल, जवाब में बरसी मार

See also  रय्यान रहमान 13 वर्षीय को हिफ्ज़-ए-कुरआन की तकमील पर की गई दस्तारबंदी, तालीम से ही संवरती है जिंदगी

पीड़ित परिवार के मुताबिक, मरीज सुशीला देवी को परिजन पटना से इलाज के लिए बेतिया ला रहे थे। रास्ते में तबीयत बिगड़ने पर उन्हें जीएमसीएच लाया गया। इलाज के दौरान जब डॉक्टर ने मरीज का ऑक्सीजन मास्क हटा दिया, तो बेटे विशाल राज ने बस इतना पूछा

—“मां का मास्क क्यों हटाया गया?”

परिजनों का आरोप है कि यही सवाल डॉक्टरों को नागवार गुजर गया। पहले बहस हुई, फिर कुछ ही मिनटों में दर्जनों मेडिकल इंटर्न छात्र मौके पर पहुंचे और विशाल राज तथा उसके भाई अमन ठाकुर पर टूट पड़े। अस्पताल का फर्श गवाह बना कि कैसे इलाज की जगह पिटाई का तमाशा चलता रहा।

मेरे बेटे ने अपराध नहीं, सवाल किया था’ — पिता

पीड़ित युवक के पिता ज्ञानप्रकाश की आवाज दर्द से भरी है। उन्होंने कहा, “मेरे बेटे की गलती बस इतनी थी कि उसने अपनी मां की सांस को लेकर सवाल पूछ लिया। इसके बदले उसे गुंडों की तरह पीटा गया। अस्पताल अब इलाज का नहीं, डर का नाम बनता जा रहा है।” बताया जा रहा है कि मरीज क्रिश्चियन क्वार्टर, बेतिया की रहने वाली थीं और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

See also  Bihar news : इनरवा में सड़क किनारे दोन नहर पर किए गए अतिक्रमण पर कार्रवाई, सीओ ने हटवाया

अधीक्षक का बयान, पर सवाल बरकरार

मामले पर जीएमसीएच की अधीक्षक डॉ. सुधा भारती ने कहा कि मरीज गंभीर हालत में अस्पताल लाई गई थी और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद परिजनों और डॉक्टरों के बीच विवाद हुआ, जो बढ़ गया।लेकिन सवाल अब भी जिंदा है—क्या विवाद का जवाब लात-घूंसे हो सकता है?

पहले भी बह चुका है खून, फिर भी नहीं जागा प्रशासन

यह पहली बार नहीं है जब जीएमसीएच हिंसा का गवाह बना हो। इससे पहले इंटर्न छात्रों द्वारा जीविका दीदियों की पिटाई
मरीज के अन्य परिजनों के साथ मारपीट, जैसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं।हर बार जांच और कार्रवाई की बात हुई, लेकिन नतीजा सिर्फ खानापूर्ति रहा।

See also  Bihar news : मैनाटाड़ पुलिस सर्किल आफिस का एसपी ने किया निरीक्षण

इलाज कराने आएं या पिटने?

लागातार हो रही घटनाओं ने लोगों के मन में डर बैठा दिया है। अब सवाल यह नहीं रह गया कि इलाज मिलेगा या नहीं, बल्कि यह है कि अस्पताल से सही-सलामत बाहर निकल पाएंगे या नहीं। प्रशासन की ढिलाई ने दोषियों के हौसले बुलंद कर दिए हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल

कब तक मरीज और उनके परिजन अस्पताल में खुद को असुरक्षित महसूस करते रहेंगे? और कब तक इलाज की जगह डर और दहशत राज करेगी?

Advertisement Advertisement Advertisement