Bihar news : राम की शक्ति पूजा आधुनिक रामायण का पुनर्सृजन” — प्रो. विनोद कुमार मंगलम

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यस बिहार | बोधगया

मगध विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा शनिवार को हिंदी भवन स्थित प्रेमचंद सभागार में “राम की शक्ति पूजा का पुनर्पाठ” विषय पर एक विशेष अकादमिक व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता कुलसचिव प्रो. विनोद कुमार मंगलम् थे।

अपने व्याख्यान में प्रो. मंगलम् ने सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की कालजयी कविता “राम की शक्ति पूजा” का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह कृति आधुनिक संदर्भों में रामायण का पुनर्सृजन है। उन्होंने इस काव्य को “सरोज स्मृति” और रामचरितमानस के प्रसंगों के साथ जोड़कर इसकी बहुस्तरीय व्याख्या की।

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उन्होंने बताया कि निराला ने बंगला रामायण के आधार पर आधुनिक दृष्टिकोण से रामकथा को नए रूप में प्रस्तुत किया है। कविता की शुरुआत से अंत तक बिंब, प्रतीक और भाव-संरचना की विशेषताओं को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें शक्ति की साधना को विजय का मूल तत्व बताया गया है।

प्रो. मंगलम् ने राम और रावण की सेनाओं के मनोभावों का विश्लेषण करते हुए कहा कि जहां एक ओर निराशा है, वहीं दूसरी ओर उत्साह भी दिखाई देता है। उन्होंने यह भी प्रश्न उठाया कि जब रावण के पक्ष में शक्ति का आभास होता है, तब राम को भी शक्ति प्राप्ति के लिए साधना करनी पड़ती है। राम द्वारा 108 कमल अर्पित करने और अंतिम क्षण में अपने नेत्र अर्पित करने की तत्परता को उन्होंने त्याग, आस्था और आत्मबल की चरम अभिव्यक्ति बताया।

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उन्होंने कहा कि इस कविता में युद्ध और प्रेम, निराशा और आशा, परंपरा और आधुनिकता जैसे विरोधी तत्वों का अद्भुत संतुलन देखने को मिलता है। सीता-राम मिलन प्रसंग को आधुनिक संवेदना के साथ प्रस्तुत करना छायावादी काव्य की उत्कृष्टता को दर्शाता है। साथ ही, निराला की दीर्घ काव्य-पंक्तियां, सशक्त बिंब और उपमाएं उनकी रचनात्मक प्रतिभा का प्रमाण हैं।

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कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद कुमार सिंह ने की। विषय प्रवर्तन करते हुए डॉ. परम प्रकाश राय ने कविता के बहुआयामी अर्थों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुशीला कुमारी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अनुज कुमार तरुण ने प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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